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श्री अशोक कुमार रक्ताले

श्री अशोक कुमार रक्ताले

लोकतांत्रिक चेतना

"चेतना ही चैतन्यता है |" इसमे जीवन का आभास है | अल्पकालिक निद्रा को चेतना का ह्रास भले कहें, चेतना की समाप्ति नहीं ही कहा जा सकता |